फर्जी दस्तावेज तैयार कर वन भूमि पर अवैध तरीके से कब्जा किया और उसे बेच दिया।

फर्जी दस्तावेज तैयार कर वन भूमि पर अवैध तरीके से कब्जा किया और उसे बेच दिया।

डेस्क
इस मामले की जांच झारखंड सीआईडी के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी कर रही है। साथ ही यह मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से इस मामले से जुड़े मूल दस्तावेजों का पूरा रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा है। झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है और आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
गौरतलब है कि इस ज़मीन घोटाले को लेकर पहले भी सीआईडी की टीम कई बार बोकारो पहुंची थी, जिससे स्थानीय प्रशासन और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया था। चास अंचलाधिकारी कार्यालय में बोकारो के डीएफओ रजनीश कुमार की उपस्थिति में सीआईडी टीम ने घंटों तक जमीन से जुड़े दस्तावेजों की गहन छानबीन की थी। मिली जानकारी के अनुसार, इस दौरान यह सामने आया कि रिकॉर्ड रजिस्टर के वॉल्यूम 60 से 75 तक के पन्ने फटे हुए पाए गए, जिनमें लगभग 400 एकड़ रिहायशी जमीन का ब्यौरा दर्ज था।
जांच में सामने आया कि यह ज़मीन कभी बोकारो स्टील प्लांट के पास थी, जिसे बाद में वन विभाग को लौटा दिया गया था। लेकिन फर्जीवाड़े के जरिए इस भूमि को माफिया तत्वों ने अंचल कार्यालय के कुछ कर्मियों और बोकारो स्टील प्लांट के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज तैयार कर बेच दिया।
इस गंभीर मामले को देखते हुए डीजीपी के निर्देश पर सीआईडी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई। सीआईडी ने बोकारो के सेक्टर-12 थाना में दर्ज कांड संख्या 32/2024 को टेकओवर कर जांच शुरू कर दी है। बोकारो वन प्रमंडल के प्रभारी वनपाल सह वनरक्षक रुद्र प्रताप सिंह ने इस मामले को लेकर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ कि भू-माफिया और कुछ सरकारी अधिकारियों ने साठगांठ कर 100 एकड़ से अधिक वन भूमि को फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए बेच दिया।